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पाकुड़: अभाविप ने भगवान बिरसा को याद, जयंती पर आयोजित किए कार्यक्रम

छात्रशक्ति डेस्क

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड के पाकुड़ नगर इकाई के कार्यकर्ताओं ने नगर के बिरसा चौक स्थित भगवान बिरसा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
सिद्धो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के संयोजक बमभोला उपाध्याय ने बताया कि देश में सबसे पहले विद्यार्थी परिषद ने ही भगवान बिरसा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रुप में मनाना आरंभ किया था।स्वाधीनता के 75 वें वर्ष पर भारत सरकार ने हमारा देश – हमारा राज का नारा देने वाले बिरसा मुंडा की जंयती को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने निर्णय लिया था। सरकार के इस निर्णय से पूरा भारतीय समाज आनंदित है। इस निर्णय से जनजाति समाज की गौरवशाली परंपरा, निडरता, वीरता और शौर्यपूर्ण बलिदानी इतिहास लोगों को जानने का मौका मिल रहा है।यह भी जानने का मौका मिला कि षड़यंत्रपूर्वक जनजाति समाज के इतिहास, शौर्य, पराक्रम और बलिदान को किस तरह छिपाया गया. स्वतंत्रता की लड़ाई में देश का कोई ऐसा भाग नहीं जहां जनजाति समाज ने बढ़-चढ़कर हिस्सा नहीं लिया। यह समाज हमेशा से ही स्वाभिमानी और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहा है।
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सत्यम भगत एवं सुमित पांडे ने बिरसा मुंडा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि 1891 में भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका और सतत संघर्ष किया। इस दौरान पूरा समाज उनके साथ खड़ा रहा। वह कालखंड स्वाधीनता के आंदोलन में रंग गया. उनके योगदान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि समाज उन्हें अपना धरती आबा यानी धरती का भगवान मानता है‌।
कार्यक्रम में मुख्य रुप से अरुण हेंब्रम, होपना मरांडी,मनीषा कुमारी, रानी कुमारी, नगर मंत्री प्रदीप मिश्रा, आलोक चौधरी, विवेक,सत्यम,नीरज, आनंद एवं अन्य कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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