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अभाविप के फेसबुक पेज पर बोली दीपिका चिखलिया, अबला नहीं शक्ति की प्रतीक थीं सीता

अजीत कुमार सिंह

नई दिल्ली। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च को देशभर में लॉकडाउन किया गया। लोगों की बढ़ती मांग के बाद 33 वर्ष बाद रामानंद सागर द्वारा निदेशित रामायण का पुनः प्रसारण किया गया। रामायण ने न केवल केवल अमिट छाप छोड़ी अपितु विश्व रिकार्ड भी बनाये। दो मई को रामायण का आखिरी एपिसोड प्रसारित किया गया। आखिरी एपिसोड के बाद रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के फेसबुक पेज पर आईं रामायण की सीता यानी दीपिका चिखलिया आईं और रामायण से जुड़ी कई अनछुए पहलुओं को उजागर किया साथ ही कई ऐसे खुलासे किये जिससे तथाकथित बुद्धीजीविकों की पोल खुल गई।

दीपिका चिखिलिया अभाविप के फेसबुक पेज पर आने के बाद सभी का अभिवादन करती हैं और कहती हैं रामायण के बारे में कहां से शुरूआत करूं समझ नहीं आ रहा। अजीब लग रहा है, आज खुद से बातें कर रहीं हूं। कल से ही मैं बहुत भावुक हूं, फिर वो कहती हैं कि रामायण को आप मनोरंजन के लिए नहीं देखें, यह कोई इंटरटेंमेंट सीरियल नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति का धरोहर है जिसमें ज्ञान है, सीख है।  रामायण के दोबारा प्रसारण के बाद साक्षात्कार के लिए कई पत्रकारों के फोन आये और आजकल मैं कईयों को इंटरव्यू दे भी रही हूं। आगे वो कहती हैं कि महिला दिवस पर कई कार्यक्रमों में जाती हूं लोग कहते हैं कि सीता अबला थीं, उन पर बहुत अत्याचार हुए जबकि सत्य बिल्कुल अलग है। भारत में नारी को देवी का स्थान है, उसे शक्ति स्वरूपा कहा जाता है। सीता के चरित्र को गौर से देखेंगे तो पता चलेगा सीता अबला नहीं अपितु शक्तिशाली थीं। हनुमान जी के साथ वो लंका से आ सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि वो इसे सिद्धांत के खिलाफ माना। वो श्रीराम को राजधर्म से परिचित करवाती है, जंगल में वो कठोर परिश्रम करती हैं।

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सीता के चरित्र का वर्णन करते – करते भावुक हुई दीपिका चिखलिया

विद्यार्थी परिषद के लाइव फेसबुक पेज पर सीता जी के चरित्र को बताते हुए एक जगह पर वो काफी भावुक हो जाती हैं। वो कहती हैं सीताजी अनेक कष्टों को उठाती हैं लेकिन अपने मर्यादा के खिलाफ नहीं जातीं। सीता जी को कुछ लोग कमजोर कहते हैं जो सर्वथा अनुचित है क्योंकि सीता तो शक्तिशाली थीं, योद्धा थीं वो तो शक्ति की प्रतीक थीं। रामायण के प्रत्येक एपिसोड आपको शिक्षा और सीख देती है। भारत युवा देश है, यहां के छात्रों और युवाओं को रामायण से सीखना चाहिए। मैं गर्भवती थीं और उसी हालत में रामानंद सागर जी से मिली। रामानंद सागर जी ने मेरे पैरे छूकर प्रणाम किया और मैंने मना किया कहा कि आपने पहले ही मुझे सीता का रोल दिया है। इसके जवाब में रामानंद जी ने कहा कि स्त्री का शरीर देवी स्वरूप होता है एक जीव से दूसरे जीव को देना सिर्फ स्त्री ही कर सकती हैं। राम के चरित्र को रेखांकित करते हुए दीपिका कहती हैं कि राम एक ऐसे राजा थे जिन्होंने एक स्त्री विवाह की परंपरा का पालन किया। सीता को राज सिंहासन पर बैठाया। भारतीय संस्कृति में स्त्री सदा अग्रणी रही हैं। पुरुष और स्त्री के बीच संघर्ष हो ही नहीं सकता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। एक स्त्री अपने जीवन में पत्नी, मां, बेटी जैसी अनेक दायित्व का निर्वहन करती हैं। ऑफिस जाती हैं काम करती है फिर घर आकर पूरे परिवार का ख्याल भी रखती है। इतना शक्ति सिर्फ स्त्री में ही हो सकती है। कुछ लोग कल के आखिरी एपिसोड के बाद कह रहे हैं रामायण खत्म हो गया, मैं बताना चाहती हूं कि रामायण कभी खत्म नहीं होता।

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रामायण से बुद्धिजीवियों को परेशानी थी

एक सवाल के जवाब में दीपिका कहतीं हैं कि हां यह सत्य है उत्तर रामायण को लेकर संसद में उस समय चर्चा हुआ था। बुद्धिजीवियों को रामायण से परेशानी थीं। इस दौरान रामानंद सागर जी पर अनेकों केस भी दर्ज हुए। वे उत्तर रामायण को नहीं बनाना चाहते थे। उन पर काफी राजनीतिक दबाव था, धोबी की स्टोरी नहीं दिखाने पर नाराजगी भी थी। उत्तर रामायण के शूट के दौरान अधिकांश वो केस के कारण बाहर ही रहते थे, उत्तर रामायण को उन्होंने निर्देशित नहीं किया।

जो उत्तर रामायण आप देख रहे हैं, वो मूल नहीं है बहुत ज्यादा एडिट करके दिखाया गया

फेसबुक लाइव के दौरान दीपिका चिखलिया ने ऐसे राज खोले जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जायेगें। दीपिका ने बताया कि रामानंद सागर जी उत्तर रामायण को लेकर काफी दबाव में थे । लोग जानना चाहते थे कि राज्याभिषेक के बाद क्या हुआ ? रामानंद जी पर इतने केस किये गये थे कि उत्तर रामायण को निदेशित भी नहीं कर पाये । इस दौरान खुलासा करते हुए वो बताती हैं कि जो रामायण आप देख रहे हैं वो मूल नहीं है जिसे हमलोगों ने शूट किया था। उस उत्तर रामायण को अनेको पर एडिट कर दिखाया गया। लाइव सेशन के दौरान किसी ने सवाल किया कि तो मूल कॉपी कहां है, कैसे देख पायेंगे तो उन्होंने कहा कि मूल कॉपी सागर के पास होगी। इसी दौरान एक दर्शक पूछता है आप अयोध्या दर्शन करने गईं तो वह कहती हैं राममंदिर आंदोलन के दौरान में दिल्ली थी, दर्शन नहीं कर पायी। अब राम मंदिर पर फैसला आ चुका है, भव्य मंदिर बनने ही वाला है। मैं निश्चित रूप से दर्शन के लिए जाऊंगी। वहीं सीता का उनके जीवन पर प्रभाव के बारे में कहती हैं सीता जी की भूमिका अदा करने के कारण मैं इतना मजबूत हो पायी हूं। सीता सशक्त थी कम बोलती थी लेकिन मैं ज्यादा बोलती हूं। अभाविप के पेज पर लाइव सेशन सुनने पर यही पता चलता है कि रामायण को लेकर तथाकथित बुद्धजीवियों में शुरू से परेशानी थी और साफ पता चलता है कि राजनीतिक दबाव के कारण ही रामायण के मूल शूट को एडिट कर दिखाया गया।

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

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