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अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री को तमिलनाडु पुलिस ने किया गिरफ्तार, लावण्या को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अभाविप कार्यकर्ता कर रहे थे प्रदर्शन

अजीत कुमार सिंह

चेन्नई। तमिलनाडु के तंजावुर जिले के सेक्रेड हाई स्कूल में मतांतरण के दबाव के कारण आत्महत्या को मजबूर होने वाली छात्रा, लावण्या को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री स्टालिन के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, अभाविप के प्रदर्शन को बर्बरतापूर्वक कूचलते हुए तमिलनाडु पुलिस ने अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी, राष्ट्रीय मंत्री मुथु रामलिंगम, दक्षिण तमिलनाडु प्रांत के प्रदेश मंत्री सुशीला समेत अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद अभाविप कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश है। बता दें कि अभाविप कार्यकर्ता लावण्या को न्याय दिलाने के लिए देश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ दिन पहले दिल्ली स्थित तमिलनाडु भवन के पास भी प्रदर्शन किया गया था।

लावण्या आत्महत्या मामले में राज्य सरकार की असंवेदनशीलता इस बात से प्रदर्शित होती है कि सरकार मद्रास उच्च न्यायालय के सीबीआई जांच के आदेश के ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय में अर्ज़ी लगाने पहुंच गई थी परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज़ करते हुए और उच्च न्यायालय के फ़ैसले को मान्य रखते हुए, मामला सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश के बाद लावण्या को न्याय दिलाने की मांग के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं के बीच न्याय की आस जगी है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री गजेन्द्र तोमर ने कहा कि तमिलनाडु सरकार तथा प्रशासन, लावण्या की आत्महत्या के मामले को दबाने के लिए सारे संभव हथकंडे अपना रहे हैं परंतु अभाविप का प्रत्येक कार्यकर्ता लावण्या को न्याय मिलने तक संघर्षरत रहने के लिए प्रतिबद्ध है। अपनी गलती और मिशनरियों के दुष्कर्म को छिपाने के लिए राज्य सरकार माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की भी अवहेलना करने से नहीं चूक रही है। हम लावण्या को न्याय मिलने तक लड़ते रहेंगे।

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वहीं अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री कु. प्रेरणा पवार ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने बर्बरता की हदों को पार कर दिया है। सरकार लावण्या की आवाज़ को दबाने का हर सम्भव प्रयास कर रही है परंतु अभाविप लावण्या की लड़ाई को लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। हम मतांतरण को रोकने के लिए क़ानून बनाने के लिए भी सरकार से आग्रह करेंगें ताकि पुनः किसी भी विद्यार्थी को ऐसे वीभत्स और दुर्दांत कृत्य का सामना न करना पड़े।

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