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अभाविप के आंदोलन की हुई जीत, मजबूरन केजरीवाल को देनी पड़ी कन्हैया समेत टुकड़े – टुकड़े गैंग पर देशद्रोह का केस चलाने की अनुमति

वर्ष 2016 के 9 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लगे देशद्रोह के नारे को कोई कैसे भूला सकता है। जेएनयू की इस घटना ने देश को झकझोर दिया था। देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जेएनयू के परिसर में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के बरसी पर कार्यक्रम का आयोजन उसमें भारत तेरे टुकड़े होगें इंशाल्लाह, इंशाल्लाह भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी, अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा है जैसे देश विरोधी नारे लगाये गये
अजीत कुमार सिंह

दिल्ली। शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आंदोलन को बड़ी जीत मिली है क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मजबूर होकर नौ फरवरी 2016 को देशद्रोही नारे लगाने एवं नफरत फैलाने के लिए कन्हैया कुमार समेत टुकड़े – टुकड़े गैंग के सदस्यों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी। दिल्ली सरकार के इस फैसले को अभाविप की बड़ी जीत मानी जा रही है। अभाविप ने टुकड़े – टुकड़े गैंग पर कार्रवाई के लिए कैंपस से लेकर सड़क तक आंदोलन किया था।

कन्हैया कुमार समेत टुकड़े – टुकड़े गैंग के सदस्यों पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा

वर्ष 2016 के 9 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लगे देशद्रोह के नारे को कोई कैसे भूला सकता है। जेएनयू की इस घटना ने देश को झकझोर दिया था। देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जेएनयू के परिसर में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के बरसी पर कार्यक्रम का आयोजन उसमें भारत तेरे टुकड़े होगें इंशाल्लाह, इंशाल्लाह भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी, अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा है जैसे देश विरोधी नारे लगाये गये। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने उस समय इसका प्रतिकार भी किया था, जिसमें विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता और जेएनएसयू के तत्कालीन संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा के साथ लोगों ने मारपीट भी थी। तब से लेकर आज तक विद्यार्थी परिषद टुकड़े – टुकड़े गैंग के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रही है और दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रही है लेकिन केजरीवाल सरकार द्वारा अनुमति नही दिये जाने के कारण यह मामला लंबित था जिस कारण पुलिस केस नहीं चला पा रही थी। विद्यार्थी परिषद के लगातार संघर्ष और दबाव के कारण मजबूर होकर शुक्रवार को इस मामले को लेकर केस चलाने की अनुमति देनी पड़ी। दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।

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बता दें कि यह फाइल दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास थी। जेएनएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर वर्ष 2016 में जेएनयू परिसर में लगे देश विरोधी नारे और समाज में नफरत फैलाने के आरोप में तीन साल बाद यानी पिछले दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया था। पिछले वर्ष 14 जनवरी को पुलिस ने कन्हैया कुमार,उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत अन्य कई के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इनलोगों पर आरोप है कि नौ फरवरी 2016 को परिसर में हुए कार्यक्रम के दौरान हुए जुलुस का नेतृत्व किया और देशद्रोही नारे लगाये । इसके अलावा इस केस में अन्य आरोपियों जैसे अश्वती नायर, समर खान, रामा नागा, कोमल मोहिते, रेयाज़-उल-हक और बानो-ज्योत्सना लाहिड़ी के मोबाइल फोन का लोकेशन जेएनयू पाया गया एवं ये सभी उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य या कन्हैया कुमार के संपर्क में थे।दिल्ली पुलिस ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए उन 13 वीडियो का सहारा लिया, जिनमें ये पूरी घटना रिकॉर्ड थी।जेएनयू देशद्रोह मामले में आरोपपत्र का संज्ञान लेना या नहीं लेना मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पर निर्भर करेगा। राजद्रोह के लिये अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। हांलाकि पुलिस का दावा है कि उसके पास अपराध को साबित करने के लिए वीडियो क्लिप हैं, जो गवाहों के बयानों से पुष्ट होती है।

जानें कब क्या  हुआ

9 फरवरी, 2016 : संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी देने के तीन साल पूरा होने के मौके पर जेएनयू परिसर में मार्च। जिसका अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया।

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10 फरवरी : जेएनयू प्रशासन का मामले पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश

11 फरवरी : दिल्ली पुलिस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व भाजपा सांसद महेश गिरी शिकायतों के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया

12 फरवरी : कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी

12 फरवरी : कन्हैया कुमार को देशद्रोह के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा

15 फरवरी : पटियाला हाउस अदालत परिसर में हिंसा, कन्हैया कुमार के खिलाफ मामले में सुनवाई से पहले वकीलों ने पत्रकारों, जेएनयू छात्रों और शिक्षकों को राष्ट्रविरोधी बताते हुए उन पर हमला किया

15 फरवरी : पटियाला अदालत हमले के मामले में दो प्राथमिकी दर्ज

17 फरवरी : पटियाला हाउस अदालत में एक और हंगामे की घटना, वकीलों के कोट पहने लोगों ने कन्हैया कुमार के मामले में सुनवाई से पहले कथित तौर पर पत्रकारों और छात्रों की पिटाई की

18 फरवरी : कन्हैया ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की

19 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट ने जमानत अर्जी दिल्ली हाइकोर्ट को ट्रान्सफर कर पुलिस को उचित सुरक्षा मुहैया कराने को कहा

19 फरवरी : कन्हैया ने जमानत के लिए हाइकोर्ट गये

23 फरवरी : पुलिस ने हाइकोर्ट में कन्हैया कुमार की जमानत अर्जी का विरोध किया

23 फरवरी : जेएनयू छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने आत्मसमर्पण से पहले पुलिस संरक्षण पाने के लिए हाइकोर्ट का रुख किया।

24 फरवरी : उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य गिरफ्तार.

25 फरवरी : कोर्ट ने जेल में बंद कन्हैया कुमार को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

26 फरवरी :  कोर्ट ने कन्हैया को तिहाड़ जेल भेजा.

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2 मार्च : कोर्ट ने कन्हैया को छह महीने की अंतरिम जमानत दी

3 मार्च : दिल्ली की अदालत ने कन्हैया की तिहाड़ जेल से रिहाई का आदेश दिया.

26 अगस्त : कोर्ट ने कन्हैया, उमर और अनिर्बान को नियमित जमानत दिया

14 जनवरी 2019 : दिल्ली पुलिस ने कन्हैया, उमर और अनिर्बान तथा अन्य के खिलाफ देशद्रोह, दंगा भड़काने एवं आपराधिक षड्यंत्र के अपराधों के तहत आरोपपत्र दाखिल किया

 

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