e-Magazine

दिल्ली हिंसा की आपबीती : भूख से तड़प रहे गोलू के लिए दूध लाने गया था पिता दिनेश खटीक, जिहादियों ने मौत की घाट उतार दी

गोलू अभी महज डेढ़ वर्ष का है। किसी की मौत क्या होती है इसे उसका कुछ पता नहीं। इस उम्र में पता होता भी नहीं। दिल्ली में जिहादी हिंसा ने उसके पिता को उससे छीन लिया है उसे इसकी भी खबर नहीं है। 24 फरवरी को दिल्ली के शिव विहार इलाके में दिनेश खटीक घर से उसके लिए दूध लेने निकले तो फिर वापस नहीं आए। जिहादी भीड़ ने उन्हें अपना शिकार बना लिया।

दिल्ली । दिल्ली में भले ही हिंसा थम गया हो लेकिन मौत का आंकड़ा थम नही रहा है। हिंसा का दर्द धीरे – धीरे बाहर आ रहा है। हिंसा भी ऐसी जो मानवता को शर्मसार कर दे। आखिर कोई अपने ही पड़ोसी, अपने ही मोहल्ले, अपने ही देश के लोगों की इतनी निर्ममता से कैसे मौत की नींत सुला सकता है। हिंसा भी ऐसी की रूह कांप जाये।  गोलू अभी महज डेढ़ वर्ष का है। किसी की मौत क्या होती है इसे उसका कुछ पता नहीं। इस उम्र में पता होता भी नहीं। दिल्ली में जिहादी हिंसा ने उसके पिता को उससे छीन लिया है उसे इसकी भी खबर नहीं है। 24 फरवरी को दिल्ली के शिव विहार इलाके में दिनेश खटीक घर से उसके लिए दूध लेने निकले तो फिर वापस नहीं आए। जिहादी भीड़ ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। सिर में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। दिनेश खटीक के बड़े भाई सुरेश खटीक ने ये जब ये आपबीती सुनाई आंखें भर आयीं।

ऐसे ही भजनपुरा चौराहे पर कैप्टन कटोरा नाम से रेस्टोरेंट चलाने वाले कमल शर्मा की बातें आंखे खोलने वाली हैं। जिहादी भीड़ ने उनके दो रेस्टोरेंट को आग के हवाले कर दिया। उन्होंने बताया कि जो लोग वर्षों से उनके रेस्टोरेंट में खाना खाने आते थे वही लोग उस रेस्टोरेंट को आग लगा रहे थे। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान सीसीटीवी के फुटेज के जरिए की।

शिव विहार के ही रहने वाले सुमित तिवारी के जीजा 32 वर्षीय आलोक तिवारी की जिहादी दंगाइयों ने सिर में गोली मार कर हत्या कर दी। वो करावल नगर में गत्ता फैक्ट्री में काम करते थे। अपने पीछे वो एक चार वर्ष का प्यारा बेटा और 9 वर्ष की बेटी छोड़ गए। इनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उनका अंतिम संस्कार भी आस पास के लोगों ने मिलकर किया है। अपने घर के में कमाने वाला आलोक ही था।

READ  Strict action must be taken against perpetrators who are creating caste disharmony in Utkal University : ABVP

भजनपुरा चौराहे पर होराइजन नाम से हाई स्कूल से लेकर इंटर तक के बच्चों के लिए इंस्टीट्यूट चलाने वाले नवनीत गुप्ता ने बताया कि दंगाइयों ने उनके इंस्टीट्यूट में आग लगा दी। अंदर 35 बच्चे फंसे थे जिनमें 20 लड़कियां थीं। कोई डेढ़ हजार से अधिक की संख्या में आए ये वो लोग थे जो पर पिछले 15 दिनों से सीएए के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने बताया कि ये लोक अचानक इतने हिंसक हो जाएंगे इसका उन्हें अंदाजा नहीं था। उन सभी के हाथों में बंदूक, तलवार, कुल्हाड़ी थी। पेट्रोल बम और पत्थर चला रहे थे।

शिव विहार के रहने वाले राहुल रुड़कीवाल ने बताया कि वह अपने ऑफिस में बैठे थे कि भीड़ ने आकर उन पर हमला किया। बड़ी मुश्किल से उनकी जान बची। दंगा पीड़ितों के दर्द को सुन कर हजारों लोगों की आंखे भर गई।

 

 

×
shares