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पुस्तक समीक्षा : अवतरण

डॉ. आलोक पांडेय

पुस्तक तो समय – समय पर पढ़ता रहता हूं लेकिन इस बार एक ऐसी पुस्तक जो कई दिनों से साथ थी उसे खत्म करने का प्रयास मैंने “ReadABookChallenge” के माध्यम से 22 मार्च को शुरू किया। पुस्तक का नाम है “अवतरण” जिसे सुनील खिलनानी ने लिखा है। पुस्तक में 50 ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है। इन ऐतिहासिक व्यक्तित्व में से कइयों के बारे में पहले पढ़ा था फिर भी पुनः उनको स्मरण करने मौका मिला। लेखक ने महात्मा बुद्ध से धीरूभाई अंबानी तक व अध्यात्म, विज्ञान, कला, राजनीति से जुड़े व्यक्तित्व को जोड़ सम्पूर्ण भारत के 50 लोगों के प्रभाव का विवरण किया है। अपनी बुद्धिमत्ता व कौशल के आधार पर उन्होंने भारत का वास्तविक चित्रण करने सफलतापूर्वक प्रयास किया है। जनसंख्या, क्षेत्रफल, भौगोलिक व राजनीतिक विविधता वाले देश के ऐसे 50 व्यक्तित्व की पहचान करना और उनकी सार्थकता बताना भारत जैसे देश में एक जटिल कार्य रहा है। खासतौर से ऐसे व्यक्तित्वों के बारे में जिनके बारे में आपने बस सुना है और उनमें से अधिकतर के कालखण्ड में आपका जन्म भी नही हुआ था। इस दृष्टि से यह महत्वपूर्ण लेखन कार्य रहा है। व्यक्तित्वों का चित्रण लेखक द्वारा जिस प्रकार से हुआ वह प्रशंसनीय है। इतिहास का विवरण जिस प्रकार से किताब में किया गया है वह रोचकता पैदा करती है।प पूर्ण पुस्तक को पढ़ने के पश्चात कुछ बिंदु मेरे मन में उभरे हैं:

  • क्या भारत का इतिहास महात्मा बुद्ध काल से शुरू होता है?
  • क्या मुझे जो अच्छा लगता है उसी आधार पर भारत या व्यक्तियों का मूल्यांकन करूँगा?
  • भारत पर बाहर से आये लोगों के प्रभाव में सिर्फ उन्हीं का चित्रण करूँगा जिसने सही दिशा में प्रभाव डाला या उनकी भी चर्चा होनी चाहिए जिनके कुकृत्यों से भी भारत प्रभावित हुआ।
  • कालखंड में भारत की विविधता को ध्यान में रखते हुए क्या व्यक्तियों का चयन सही था?
  • विभिन्न आयामों व क्षेत्रों से चयनित उस समय के भारत या बाद के भारत को प्रभावित करते हैं?
  • चयनित व्यक्तित्व क्या समकालीन समय में सर्वश्रेष्ठ था ?
  • भारत की संस्कृति और विकास को वृहद स्तर पर प्रभावित करने वाले इनमें से कितने थे?
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जब उपरोक्त प्रश्नों का उत्तर ढूंढने का प्रयास करता हूं तो पुस्तक कहीं से भी न्याय करती हुई नही दिखाई देती। भारत की सांस्कृतिक विरासत और चरित्र का मूल्यांकन इन व्यक्तिव के आधार पर करना गलत है। भारत एक युवा देश है और यहां के जनमानस को प्रभावित करने वाले व्यक्तित्वों में विचार की क्रांति पैदा करने वाले अधिकतर व्यक्तियों का छोड़ा जाना आश्चर्य उत्पन्न करता है। कुल मिलाकर मेरा मेरा मानना है कि जिन व्यक्तित्व की चर्चा इस पुस्तक में की गई है वह मनमोहक तो है लेकिन सम्पूर्ण भारत सही चित्रण प्रस्तुत नही कर रहा है। गुप्त काल, तानसेन, मुहम्मद गौरी, औरंगजेब, राजा रणजीत सिंह, जगदीश चंद्र बोस, दयानंद सरस्वती, मैकाले, मदन मोहन मालवीय, फील्ड मार्शल मानेकशॉ, डॉ केशव हेडगेवार, विक्रम साराभाई, लता मंगेशकर, लाल बहादुर शास्त्री, किशोर कुमार, अमिताभ बच्चन जैसे अनेक व्यक्तियों का मानस पटल पर प्रभाव रहा है।

(समीक्षक अभाविप प्रकल्प ‘शोध’ के राष्ट्रीय प्रमुख हैं)

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