e-Magazine

हनुमान जी से जीवन की सीख

आश्विनी कुमार

कोरोना के कारण समूचा विश्व भयग्रस्त है स्वयं के नागरिको के बचाव के लिए नाना प्रकार के उपाय, व्यवस्थायें और नियम लागू करने में लगे हैं। भारत में भी इस महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन की घोषणा हुई व 135 करोड़ भारतवासी इसका पालन कर रहे हैं।  इसी दौरान शक्ति आराधना पर्व नवरात्रि, श्रीरामनवमी और चैत्र शुक्ल पूर्णिमा यानी श्री हनुमत प्राकट्योत्सव् भी आये नागरिको की ह्रदय इच्छा के अनुरूप ही भारत सरकार द्वारा रामानंद सागर निर्मित श्रीरामायण का प्रसारण शुरू किया गया देश इस समय कुटुंब के साथ अपने आराध्य के जीवन से प्रेरणा ले रहा है एक और जहां श्रीअयोध्या में श्रीरामलला अपने भव्य जन्म भूमि मन्दिर बनने जा रहा है, वहीं दूसरी और राम से पहले राम की कथा, चरित्र देश देख रहा है हमारी भावी पीढ़ी भी इसमें रस ले रही है रामायण समाज जीवन में बहुत प्रेरणा देती है। वहीं इस महाकाव्य रामायण का एक ऐसा चरित्र श्री हनुमान जो हमें अनुशासन, ईमानदारी, दृढ़ता के साथ जीवन को जीने की सही राह दिखाता है। अभाविप में एक कार्यकर्ता के नाते अपने संगठन कार्य में श्रीहनुमान से कदम – कदम पर प्रेरणा मिलती है मानसिक व शारीरिक, व्यावहारिक सभी रूपों में आंजनेय आदर्श हैं। उनके कुछ गुण मैं यहां जिक्र करना चाहता हूं –

व्यक्तित्व (Personality) –

महावीर विक्रम बजरंगी,कुमति निवार सुमति के संगी ।
कंचन वरन विराज सुवेसा,कानन कुंडल कुंचित केसा ।।

श्री हनुमान विशेष पराक्रम वाले, नकारात्मक विचार को खत्म करने वाले व सकारात्मक विचार का साथ देने वाले हो, सुसज्जित वस्त्र कानो में कुंडल व घुंघराले बालो से शोभायमान हो, हम हनुमान जी के चरित्र को आदर्श मानते है उनका व्यक्तित्व शत्रुओ में भी उत्त्पन्न करने वाला है तथा मित्र संगियो में हर्ष देने वाला है। अपने व्यक्तित्व ठीक करने के लिए हम हनुमान जी के इस गुण को अंतर्भूत कर सकते हैं नकारात्मकता को त्यागते हुए सदैव सकारात्मक देखने की दृष्टि व हमारा परिधान, दिखावा व्यवस्थित हो।

READ  रामलला ने स्वयं जीता है अपना मुकदमा – चंपत राय

कर्तव्यनिष्ठा (Conscientiousnes) –

लाय संजीवन लखन जियाए,
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए ।
रघुपति कीन्ही बहुत बडाई,
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।

हनुमान जी को जो भी कार्य सौंपा गया उसे उन्होंने हर हाल में पूर्ण किया। अपने कर्तव्य के प्रति अडिग रहकर प्रभु श्रीराम की आज्ञा पालन के लिए विनम्रता से स्वयं को समर्पित किया जिस समय श्रीलक्ष्मण रण भूमि में मूर्छित हो गए थे, उनके प्राणों की रक्षा के लिए हुनमान जी को संजीवनी बूटी लाने का काम सौंपा। जब संजीवनी की पहचान नहीं हो सकी तो हनुमान जी पूरे पहाड़ उठा लाए हनुमान जी की कर्तव्यनिष्ठा हमें अपने कर्तव्य के प्रति संकल्पित होकर लगे रहना चाहिए।

ज्ञानवान (Knowledgeable)

विद्यावान गुनी अति चातुर,

राम काज करिबे को आतुर ।

केवल डिग्री के पीछे नहीं बल्कि व्यवहारिक ज्ञान का ज्ञाता होना भी आवश्यक है। आज के समय में जब मल्टीटेलेन्टेड पर्सनलिटी को महत्व दिया जाने लगा है। ऐसे समय में श्री हनुमान जी का यह गुण सभी को आत्मसात करना चाहिये और सैदेव अपने कार्य को रूचि से करते रहना चाहिए।

अच्छे श्रोता बनना (Be a good listener) –

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,

राम लखन सीता मन बसिया ।।

अपने अंदर अच्छे वक्ता के साथ – साथ अच्छे श्रोता का गुण भी होना आवश्यक है, धैर्य से किसी भी विषय या वक्ता को सुनना ही आपके कर्तव्य को पूरा करने में सहायक सिद्ध होता है।

अपनी क्षमताओ का सही समय पर उपयोग करना (Use your capabilities at the right time) –

 सूक्ष्म रूप धारि  सियहिं दिखावा,

बिकट रूप ऋरि लंक जरावा ।

READ  नरेंद्र मोदी को जिताने वाले कौन हैं, क्या चाहते हैं ?

भीमरूप धरि असुर संहारे,

रामचंद्र के काज संवारे ।।

सीता जी को सूक्ष्म रूप में मिलना, लंका जलाने के लिए विकट रूप करना और फिर राक्षसों के संहार के लिए विशाल रूप में उनमे भी बढ़ाना अपने कार्य के अनुरूप यथासमय विवेक से अपनी क्षमताओं का उपयोग करना चाहिये।

 अपने विचार के प्रति समर्पण (Surrender to your idea)

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,

अस बर दीन जानकी माता।

राम रसायन तुम्हरे पासा,

सदा रहो रघुपति के दासा ।।

माता सीता से आठ प्रकार सिद्धि और नौ प्रकार की निधियों के ज्ञाता होने का वरदान प्राप्त होने पर भी श्रीराम की सेवा, राम नाम के गुणगान में ही लींन रहना हुनमान चरित्र से हमें प्रेरणा मिलती है। ज्ञानवान    या बलवान होने पर भी विनम्रता के साथ अपने कार्य एकाग्रता रखना अहंकार से दूर रहना आवश्यक है।

श्रीरामायण और हुनमान चरित्र हमारे जीवन में कठिन से कठिन परिस्थिति में विनम्र, सहज रहकर निपुणता से प्रत्येक कार्य को करना सिखाते हैं। आज कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में इस हनुमान जयंती पर आंजनेय से विश्व कल्याण की प्रार्थना है, जय जय श्रीराम।

(लेखक अभाविप गुजरात प्रांत के प्रदेश संगठन मंत्री हैं)

×
shares