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राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए खोला शिक्षा का द्वार : धर्मेन्द्र प्रधान

छात्रशक्ति डेस्क

केंद्रीय शिक्षा,कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज रविवार को प्राध्यापक यशवंत राव केलकर युवा पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । अभाविप द्वारा दिए जाने वाला प्रतिष्ठित यशवंत राव केलकर युवा पुरस्कार, इस वर्ष महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा जिले के युवा समाज सेवी नंद कुमार पालवे को दिया गया है। यह कार्यक्रम राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित किया गया जिसमें देश के सभी प्रांतों से अभाविप के सैकड़ों कार्यकर्ता सम्मिलित हुए।

समारोह के मंच पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ युवा पुरस्कार से सम्मानित  नंद कुमार पालवे , अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजशरण शाही, राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल, अभाविप की अखिल भारतीय छात्रा कार्य प्रमुख मनु कटारिया, अभाविप जयपुर प्रांत संगठन मंत्री अर्जुन तिवारी, रतन शर्मा उपस्थित रहे।

यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित नंदकुमार पालवे ने कहा कि,”यह पुरस्कार प्राप्त करना मेरे लिए ‌सौभाग्य की बात है।‌ वर्तमान में सेवा क्षेत्र में युवाओं का आगे आना जरूरी है,जिनको कार्य करना है उन्हें सिर्फ मार्ग दिखाई देता है, जिन्हें काम नहीं करना वे सिर्फ बात‌ करते हैं। प्राध्यापक यशवंतराव केलकर जी ने अनेक युवाओं को प्रेरित किया। हम युवाओं को एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो समूचे विश्व का नेतृत्व करने वाला हो। वर्तमान समय में मनोरोगियों की संख्या कम हो इसलिए जरूरी है कि उनसे संवाद किया जाए,वक्ता से अधिक लोग श्रोता हों। सेवाभाव हमें बेहतर व्यक्ति बनाता है,सेवा को धन की नहीं बल्कि इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।”

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि अभाविप कार्यकर्ता के रूप में मैं अपने छात्र जीवन के दौरान जयपुर में आयोजित हुए अधिवेशन में आया था, यहां पुनः आना मेरी उपलब्धि है। अभाविप का कार्यकर्ता एक तरह से विश्व के सबसे संवेदनशील विश्वविद्यालय का छात्र है, यहां का करिकुलम यशवंतराव केलकर जैसे दूरदर्शी व्यक्ति ने बनाया था। आज का समय ऐसा है जब लोग बस की बगल वाली सीट पर दूसरों को‌ जगह नहीं देना चाहते, ऐसे समय में यशवंतराव केलकर पुरस्कार से आज सम्मानित हो रहे नंदकुमार पालवे 200 से अधिक निराश्रितों तथा दिव्यांगों की सेवा कर रहे हैं, पालवे जी का उदाहरण प्रेरणादायी तथा अनुकरणीय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण कार्य है, अभाविप जैसे जन संगठन को इसके क्रियान्वयन के लिए आगे आना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अधिक आयु के लोगों के लिए भी शिक्षा के द्वार खोले हैं, भारतीय भाषाओं को ज्ञान व‌ शिक्षा का माध्यम बनने के मार्ग पर प्रशस्त किया है, आज विभिन्न देशों के लोग भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। अभाविप सृजनशील तथा रचनाधर्मिता के गुण से युक्त संगठन है। अभाविप के कार्यकर्ताओं में व्यवस्था परिवर्तन का साहस है,आशा है मेधा शक्ति के साथ संवेदनशीलता से युक्त युवाशक्ति देश को बेहतरी के पथ पर ले जाएगी।

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