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भारत 2047 पर युवाओं के विचार, स्वस्थ, समृद्ध और विकसित भारत का सपना हो साकार

छात्रशक्ति डेस्क

जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 68 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में भारतीय स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष पर युवाओं ने अपने विचार व्यक्त किए।  भारत 2047 पर युवाओं के विचार को जानने के लिए छात्रशक्ति संवाददाता ने उनसे बात की और उनके विचार जाने। प्रस्तुत है कुछ चुनिंदा विचार –

जनजातीय जीवन की बेहतरी का सपना

भारत एक गाँव प्रधान देश है, भारत की अधिकांश जनसंख्या गांवों मे निवास करती है । ग्रामीण जनसंख्या का भी एक भाग जो की समाज की मुख्य धारा से आजादी के 75 सालों के बाद भी प्रभावी रूप से नहीं जुड़ पाया है एवं अभी भी वो दुर्गम इलाकों मे निवास कर रहे हैं । संविधान ने इनके अधिकारों की सुरक्षा एवं विकास को ध्यान में रखते हुए ‘अनुसूचित एवं जनजातीय’ की विशेष संज्ञा प्रदान की एवं संविधान के भाग 10 में अनुच्छेद 244 के तहत इनके प्रशासन के विषय में उपबंधों की व्याख्या की है । भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जनजातीय जनसंख्या वाला देश है । 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी का 8.6 प्रतिशत जनजातीय जनसंख्या का हिस्सा है जो लगभग 10.45 करोड़ के आस पास है। जनसंख्या के इस समूह की गणना भारत की सबसे पुरातन जन समूहों  में से होती है । यह समूह सबसे ज्यादा जीवंत एवं उत्साह से भरपूर , सांस्कृतिक रूप से समृद्ध , भिन्न संस्कृति एवं जीवन शैली, भिन्न भाषा एवं खानपान एवं भिन्न सामाजिक परम्पराएं एवं मान्यताएं स्वयं में आत्मसात किए पुरातन काल से अपनी संस्कृति को बचाए रखते हुए चले आ रहे हैं ।  भारत की वेदोक्त सनातन संस्कृति का सजग वाहक आज भी वनवासी समाज ही है क्योंकि अभी भी इस समाज की संस्कृति में प्रदूषण नहीं हुआ है, मलीनीकरण नहीं हुआ है । वनवासी समाज स्वयं को प्रकृति का हिस्सा मानता है एवं धरती को माता मानता है।  वर्तमान सरकार समाज के इस जन समूह को  “सबका साथ एवं सबका विकास”  के नारे के तहत समाज एवं अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा के  साथ जोड़ने की दिशा में निरंतर रूप से कार्य कर रही है ।इसी दिशा में भारत सरकार का एक प्रमुख योजना   “एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल”  योजना है। केन्द्रीय बजट 2018-19 में भारत सरकार ने योजना की घोषणा की जिसका उद्देश्य आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना है । सरकार ने इन स्कूल की स्थापना के लिए उन ब्लॉकों के चयन का लक्ष्य रखा है जहां 50% से अधिक जनजातीय आबादी है। ये स्कूल नवोदयविद्यालय की तरह संचालित किए जाने का लक्ष्य है परंतु इन विद्यालयों में इस बात पर विशेष बल दिया जाएगा जिससे स्थानीय कला एवं संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित किया जा सके ।  इस योजना के तहत कुल 740 स्कूल प्रस्तावित है जिसमें से अभी तक 684 स्कूलों की स्थापना की अनुमति प्रदान की जा चुकी है एवं 378 स्कूल अब तक वास्तविक रूप से 1.05 लाख छात्रों के प्रवेश के साथ कार्य कर रहे हैं। मुझे आशा है कि भारत के 100वें वर्ष में जनजातीय जीवन और बेहतर होगा तथा समाज की मुख्यधारा में और भी मजबूत से जुड़ेंगे।

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-मुस्कान उपाध्याय, लखनऊ

 

How do we see India in 2047 !

As an Indian, we believe that India is growing in all dimensions as it has become the largest producer of milk in the world , top three producers of wheat in the world and also has become the largest growing middle class. Many years ago India was being called as “sone ki chidiya” and across this expanse of time nation has acquired much more. If we discuss in terms of purchasing power parity, India is world’s third largest economy. Accessing the impact of the foundational changes and the structural transformation that has happened in the last few years, preparing India to rapidly grow. CII estimates India in 2047 to be a 35-45 trillion economy, taking us into the league of developed nations, a prosperous country, a country that cares for every single citizen of the country. – Shambhavi Tomar, Bulandshahr

भारत 2047

 

देश आज़ादी के 75वे वर्ष में है तब २ वर्ष पहले कोरोना की विकट परिस्थिति में जिस प्रकार से भारत ने विश्व के सभी देशोंको सहायता की है वह एक पालक ही कर सकता है। एक गुरु के तौर पर विभिन्न परिस्थितिमें कई राष्ट्रों के बीच शांति प्रस्थापित करने की भूमिका देश ने निभायी है वह हम सभी भारतीय के लिये गौरवपूर्ण है तथा आगामी समय में भारत वैश्विक गुरु के रूप में प्रस्थापित होने के हमारे विचार को सुनिश्चित करता है।

आज के समय में देश जिस प्रकार से विकास के पथ पर आगे बढ़ा है वह आज से 25 वर्ष बाद दुगना होगा ऐसा विश्वास सामान्य जनमानस और युवाओं के बीच है क्योंकि आज की युवा पीढ़ी जिस बदलाव को देख रही है वही पीढ़ी वर्ष 2047 में देश में कई निर्णायक भूमिकाएँ निभाने वाली होगी।

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आज का युवा देश को 25 वर्ष बाद ऐसा देखना चाहता है जहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ही विधान हो, जहां १,००,००० यूनिकॉर्न हो, जहां ३ ट्रिलियन की इकॉनोमी के साथ कोई भी बिना छत के ना सो रहा हो, जहां सार्वजनिक यातायात इतना अच्छा हो कि निजी वहाँ निकालने का कोई सोचभी ना सके और जहां हर एक इमारत “Carbon Neutral” हो, जहां कोई भी बच्चा स्कूली शिक्षा से विश्वविद्यालय तक बिना किसी खर्च पढ़ सके।आज की युवा पीढ़ी “Can Do” पीढ़ी है जो किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकती है और जो 2047 में विश्व को मार्ग दिखाने वाले भारत का निर्माण करने का रुतबा रखती है। – समर्थ भट्ट, गुजरात

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कृषि भारत के एक बड़े वर्ग की आय का साधन है ओर देश के लोगों का पेट भी भरता है । परंतु इस सब के बाद भी कृषि क्षेत्र सबसे कम आय का ओर पिछड़ा उद्योग । जहां किसान कई बार लागत वसूल नही पाता ओर क़र्ज़ के तले दब जाता है या आत्महत्या कर लेता है । इन सब विषयों के लिए काफ़ी हद सरकारें ओर प्रशासन भी ज़िम्मेवार ओर खुद भी किसान नई तकनीक या नई फ़सलो के उत्पादन से अनभिज्ञ है । कृषि क्षेत्र में पूँजी निवेश के साथ साथ आधुनिक तकनीक के प्रयोग के लिए किसानों को जागरूक ओर सक्षम बनाने का कार्य सरकार का दायित्व है । भारत अब आबादी बढ़ने के कारण छोटी होती कृषि भूमि की समस्या से जूझ रहा है । जिससे अब इन छोटी होती कृषि भूमि में अधिक से अधिक उत्पादन हो सके इस प्रकार की फ़सलो के उन्नत बीज का उत्पादन कृषि विज्ञानियों द्वारा किया जाना चाहिए । साथ उनकी रोग़ प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी क्यूँकि अत्यधिक कीटनाशकों के प्रयोग के दुष्परिणाम हम सब देख रहे है । सिंचाई के साधन अभी पूरे भारत में कम ही है ओर बिना नहरी पानी या जलकूपों की सुविधा से वंचित शुष्क या अर्ध शुष्क इलाक़ों में सिंचाई के आधुनिक माध्यमों के प्रयोग  यानी ड्रिप सिंचाई जैसे माध्यमों का प्रयोग अधिक हो यह प्रयास किया जाए । बाढ़ या सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी के लिए हमें अपने मौसम विज्ञान प्रणाली को अत्यंत उन्नत बनना होगा जिससे किसान ऐसी फसल चुन सके जो बाढ़ सूखे जैसी आपदाओं को झेलने में सक्षम हो तथा फसल चक्र का चुनाव किसान सही ढंग से कर सकें। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भी जलवायु चक्र अब बदल रहा इसलिए अलग इलाक़ों में उसकी जलवायु के अनुकूल फ़सलो की खेती के लिए किसानो को प्रोत्साहित करना चाहिए । ताकि नुक़सान से किसान बचे रहे . आने वाले समय में कीटनाशकों या रासायनिक खादों के प्रयोग से मुक्त कृषि से जैविक कृषि की तरफ़ हमें बढ़ना होगा ताकि इन केमिकलो के कारण होने वाले रोगों से जनसामान्य को सुरक्षित रखा जा सके । हर प्रकार की उपज चाहे वो बाग़वानी की हो या अनाज इनके भंडारण की व्यवस्था उन्नत हो ताकि किसान की फसल सुरक्षित रहे आने वाले समय भारत अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भर ना होकर अन्न निर्यातक बने हमें इस पर विचार व कार्य करना होगा जिससे भारत के किसान खुशहाल ओर सम्पन्न बने। –सौरभ लोचब, दिल्ली प्रांत

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भारत 2047 के संदर्भ में विधि के क्षेत्र में कई परिवर्तनों की आवश्यकता है वस्तुतः देखा जाए तो विधि क्षेत्र में उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख भाषा अंग्रेज़ी भाषा है जिसमें परिवर्तन किया जाना आवश्यक है। साथ ही भारतीय न्यायपालिका की कॉलेजियम व्यवस्था को परिवर्तित किया जाना चाहिए इसके अतिरिक्त मैकाले द्वारा लिखित भारतीय दण्ड विधान में परिवर्तन कर उसे भारतीय समस्याओं के अनुरूप पुनर्लिखित किया जाना चाहिए।

भारत 2047 के संबंध में विधि क्षेत्र में महिलाओं के विषय को दृष्टिगत रखते हुए महिलाओं से संबंधित प्रमुख नियमों में परिवर्तन किया जाना आवश्यक है।इस प्रकार से विधि क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तनों की कल्पना,हम भारत 2047 के संदर्भ में कर सकते हैं, जिससे आम लोगों के लिए न्याय की राहें खुल सकें। -राधिका उज्जैन

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