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छात्रशक्ति जनवरी 2023

संपादकीय 

26 दिसम्बर 2022 को एक नयी पहल के लिये जाना जायेगा। देश-धर्म के लिये गुरु गोविंद सिंह जी के चारों पुत्रों बाबा अजित सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतह सिंह के किशोरावस्था में किये गये बलिदान को स्मरण कर कृतज्ञ राष्ट्र ने अपने कर्तव्य का ही पालन किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुपुत्रों के बलिदान की पुण्य स्मृति में इस दिन को प्रतिवर्ष बालवीर दिवस के रूप में मनाये जाने का आह्वान किया है।

अल्पायु गुरुपुत्रों को सरहिंद के जमींदार द्वारा जीवित ही दीवार में चिनवा दिये जाने का लोमहर्षक और बर्बर कृत्य एक ओर आक्रमणकारियों की उन्मादी मनोदशा को दिखाता है वहीं देश की बलिदानी परिपाटी के सम्मुख श्रद्धानत होने के लिये प्रेरित करता है।

बालवीरों की गाथाएं भारत में सदा प्रेरणा देती रही हैं। नचिकेता और यमराज का संवाद इसका श्रेष्ठ उदाहरण है जिसमें नचिकेता की निर्भयता ने यमराज को भी उसकी मांगें मानने के लिये विवश कर दिया। उल्लेखनीय है कि यम के सामने भी नचिकेता ने अपने लिये नहीं लोककल्याण के लिये ही आत्मतत्व और अग्नितत्व का ज्ञान पाने की आकांक्षा की थी।

निकट इतिहास में भी भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में अनेक ऐसे बालवीरों का उल्लेख आता है जिन्होंने कम आयु में भी असह्य कष्टों के बाद भी झुकना स्वीकार नहीं किया। ऐसी अनेक घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं जब इन बालवीरों को दंडित किया गया, कोड़े लगाये गये, जेल में भेजा गया, कालापानी की सजा हुई, मृत्युदण्ड तक दिया गया। लेकिन बिना डरे, बिना झुके यंत्रणा और मृत्यु का सामना करने वाले यह बालवीर स्वाधीनता आन्दोलन में अपना सर्वोच्च योगदान कर गये। स्वाधीनता के इस अमृत महोत्सव के अवसर पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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स्वाधीनता पाना यात्रा के एक चरण की सम्पूर्ति थी। इसे स्वतंत्रता तक ले जाने के साथ ही वे प्रयास भी किये जाने आवश्यक थे जिनका स्वप्न स्वतंत्रतासेनानियों ने देखा था। भारत को सशक्त, समृद्ध और स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में विश्वपटल पर स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य आज भी हमारे सामने है। इसे पूरा करने किये निश्चित ही नयी पीढ़ी को प्रवृत्त करना होगा।

छात्र-युवाओं के प्रतिनिधि संगठन के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सहज दायित्व है कि इस दिशा में अपने प्रयासों को और अधिक परिणामकारी, और अधिक प्रभावी बनाये। इसके लिये पहल और प्रयास पहले से ही अपने विभिन्न आयामों के माध्यम से अभाविप करती रही है। अब इस दिशा में एक सुनियोजित कार्ययोजना के साथ परिषद की आगामी दिशा पर राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री श्री प्रफुल्ल केतकर ने जयपुर में सम्पन्न राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रकाश ड़ाला। सदैव की भांति अन्य गतिविधियों ने भी कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया जिसका विवरण इस अंक में विस्तार से दिया गया है।

देश भर में अलग-अलग नामों से मनाये जाने वाले संक्रमण पर्व मकरसंक्रांति एवं गणतंत्र दिवस की शुभकामना सहित,

आपका

संपादक

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