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महिलाओं की सुरक्षा एवं अधिकारों को सुनिश्चित करता है यूसीसी: बांसुरी स्वराज

छात्रशक्ति डेस्क

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बीती रात पेरियार मेस, जेएनयू में “समान नागरिक संहिता: लैंगिक न्याय, समानता और बंधुत्व की आवश्यकता” विषय पर एक मेस टॉक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बांसुरी स्वराज, जो वर्तमान में भारतीय उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता हैं, उपस्थित थीं। उनके अलावा कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जेएनयू में सेंटर फॉर कोम्प्रेहेंसिवे पॉलिटिक्स एंड पोलिटिकल थ्योरी में सह-प्राध्यापक डॉक्टर रवि रमेशचंद्र शुक्ला मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेएनयू के स्पेशल सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ की सहायक प्राध्यापक डॉक्टर आयुषी केतकर ने की। वक्ताओं ने यूसीसी के संबंध फैलाई जा रही भारतीयों को स्पष्ट किया एवं यूसीसी के सकारात्मकता एवं प्रासंगिकता पर छात्रों का ध्यान केंद्रित किया। बांसुरी स्वराज ने अपने व्याख्यान में यूसीसी को महिलाओं की सुरक्षा एवं अधिकारों को सुनिश्चित करने वाला बहुप्रतीक्षित कानून बताया, और कहा की यह कोई नया कानून नही है, बाबा साहब अम्बेडकर ने भी पूर्व में इस कानून को लागू करने की अनुशंसा की थी।

 

इस कार्यक्रम के माध्यम से पेरियार मेस में समान नागरिक संहिता, लैंगिक न्याय, समानता और बंधुत्व की आवश्यकता पर गहराई से चर्चा की गई। जिसमें वक्ताओं ने यूसीसी के सात महत्वपूर्ण पक्षों पर छात्रों को स्पष्टता पूर्वक व्याख्यान दिया। तथा इस कानून से संबंधित भ्रांतियों को समाज में चर्चा करते हुए दूर करने का आग्रह भी किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बांसुरी स्वराज ने समान नागरिक संहिता के बारे में कहा “समान नागरिक संहिता लैंगिक न्याय, समानता और बंधुत्व के लिए आवश्यक है। यह सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करेगा, चाहे उनका धर्म या समुदाय कुछ भी हो। यह संहिता महिलाओं की सुरक्षा एवं अधिकारों को सुरक्षित एवं सुनिश्चित करने का काम करेगा।”  लिविंग संबंधों के विषय में यूसीसी से संबंधित फैल रही भ्रांतियों को लेकर उन्होंने कहा, “संबंध भले ही जायज या नाजायज हो जाए लेकिन संतान कभी न जायज नहीं होती। लिविन संबंध या विवाहेत्तर संबंधों से उत्पन्न संतानों के अधिकार एवं इस प्रकार के संबंधों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो यह यूसीसी में सुनिश्चित किया गया है”। विद्यार्थी परिषद के विषय में उन्होंने कहा, “मैंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुवात ही एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में की थी, जहां मेरी ट्रेनिंग हुई है। और जब आज पहली बार राजनैतिक कैरियर की शुरुवात कर रही हूं, तो मेरा सौभाग्य देखिए की इस नए कैरियर की शुरुवात आज जेएनयू में अपने परिवार एबीवीपी के बीच आकर करने का मौका मिल रहा है। यहां बैठा एबीवीपी का एक एक कार्यकर्ता मुझे एक सामाजिक और राजनैतिक क्रान्ति दिखाई देता है।”

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विशिष्ट अतिथि डॉक्टर रवि रमेशचंद्र शुक्ला ने समान नागरिक संहिता के ऐतिहासिक और सामाजिक पहलुओं पर बात की। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता भारत के संविधान की मूल भावना के अनुरूप है। यह कोई नया कानून नही है अंबेडकर जी ने भी पूर्ण मैं इस कानून की अनुशंसा की थी, एवं पूर्व में अन्य सरकारों में कई बार सांसद में इस संहिता की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता पर सकारात्मक चर्चाएं हो चुकी हैं।”

कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉक्टर आयुषी केतकर ने कहा “समान नागरिक संहिता महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करेगा। ”

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