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विक्रांत खंडेलवाल

जालियांवाला बाग नरसंहार की अनकही दास्तां

जलियांवाला बाग नरसंहार  शताब्दी वर्ष पर शहीदों को सत सत वंदन “जलियांवाला बाग ये देखो यहां चली थी गोलियां , यह मत पूछो किसने खेली यहां खून की होलियां । एक तरफ बंदूके दन दन एक तरफ की टोलियां, मरने...

पुस्तक समीक्षा : राष्ट्रीय विमर्श का आह्वान

सन 2001 में पंडित रामेश्वर प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित “राष्ट्रीय विमर्श का आह्वान” पुस्तक  पढना प्रारंभ किया है। प्रोफेसर रामेश्वर प्रसाद मिश्र ,काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र ए...

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