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कारण बताओ नोटिस जारी कर छात्रों को डराने का प्रयास कर रहा जामिया प्रशासन: अभाविप

छात्रशक्ति डेस्क

अभाविप ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट(CUET) को पूर्ण रूप से लागू करने को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का विद्यार्थी परिषद कड़ा विरोध करती है तथा जामिया प्रशासन से इस नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग करती है।

गौरतलब हो कि भारत के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए यूजीसी ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट(CUET) प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। परंतु जामिया प्रशासन द्वारा इस निर्णय की अवहेलना करते हुए केवल बीस पाठ्यक्रमों में ही सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश दे रही है। जिसके विरूद्ध अभाविप ने 14 मार्च को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सभी पाठ्यक्रमों में सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश देने की मांग कर विश्वविद्यालय प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा था। प्रदर्शन के उपरांत अगले दिन जामिया प्रशासन द्वारा प्रदर्शन में शामिल 3 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी गई, यह पूर्ण रूप से गलत तथा छात्रों की आवाज़ को दबाने वाला जामिया प्रशासन का तानाशाही रवैया है। सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश देने की मांग पर अभाविप द्वारा किए गए प्रदर्शन में शामिल छात्रों को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तथा निंदनीय है। सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए CUET अनिवार्य है,तो केन्द्रीय विश्वविद्यालय‌ होने के बावजूद जामिया विश्वविद्यालय का सभी कोर्सेज में CUET के माध्यम से प्रवेश नहीं देना गलत है तथा देश के आम छात्रों के साथ अन्याय करने वाला निर्णय है।

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जामिया प्रशासन के तुगलकी रवैए के विरोध में अभाविप यूजीसी तथा शिक्षा मंत्रालय से कार्रवाई की मांग करती है, यदि समाधान नहीं हुआ तो छात्रों का बड़ा प्रदर्शन जामिया के तानाशाही रवैए के विरोध में किया जाएगा।

अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री हर्ष अत्री ने कहा कि शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक प्रदर्शन में शामिल छात्रों को डराने के लिए नोटिस जारी करना जामिया प्रशासन का छात्रों की आवाज को दबाने के लिए उठाया गया तानाशाहीपूर्ण कदम है। जिसका अभाविप पुरजोर तरीके से विरोध करती है व जामिया प्रशासन से इस नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग करती है और साथ में यह भी आह्वान करती है कि सीयूईटी से संबंधी अगर हमारी मांगो पर विचार नहीं किया गया तो हम जामिया प्रशासन के खिलाफ छात्रों के हित में सड़क पर उतरेंगे।

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