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भारतीय परिसर संस्कृति को पुनर्स्थापित करेगा अभाविप का परिसर चलो अभियान: याज्ञवल्क्य शुक्ल

छात्रशक्ति डेस्क

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा “युवा दिवस” के अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के “इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस” स्थित “सेमिनार कॉम्प्लेक्स” में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने परिसरों को जीवंत बनाने एवं परिसर संस्कृति को पुनर्स्थापित करने हेतु अभाविप की देशव्यापी मुहिम “परिसर चलो अभियान” का बीएचयू से शुभारंभ किया तथा विवेकानंद जी से अनुप्राणित होकर देश के विद्यार्थियों को इस अभियान में सहभागिता हेतु आह्वान किया गया।  बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यसमिति एवं कार्यकारी परिषद बैठक में विद्यार्थियों की परिसर में घटती उपस्थिति से उपजे चिंतन के परिणामस्वरूप “परिसर चलो अभियान” की घोषणा की गई थी। इस अभियान का शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल द्वारा महामना की बगिया बीएचयू से किया गया।

परिसर चलो अभियान के बारे में  जानकारी देते हुए अभाविप राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि परिसर चलो अभियान एक जनांदोलन है,  इसको दो-चरणों में 10+2 के विद्यार्थियों से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों में अध्ययनरत छात्रों के मध्य वर्षभर चलाने की योजना है। प्रथम चरण में छात्र संवाद, छात्र संसद, प्रेरक उद्बोधनों, विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों की परिसरों के प्रति रुचि बढ़ाने एवं परिसरों में छात्रसंघ, विद्यालयों में प्रायोगिक कक्षाएं तथा कला, खेल, सेवा और पर्यावरण संबंधी प्रकल्प की शुरुवात से परिसरों में सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर दिया जाएगा। द्वितीय चरण में शिक्षा क्षेत्र के सभी हितधारकों से संवाद कर इस दिशा में कार्य कर परिसर जीवंत बनाने, रोज़गार सृजन का केंद्र बनाने एवं परिसर को रुचिकर बनाने हेतु कैंटीन, खेल प्रांगण तथा छात्र कल्याण केन्द्र जैसी व्यवस्थाओं को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं काशी प्रांत के प्रांत मंत्री अभय प्रताप सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से आज के युवाओं को सीख लेने की जरूरत है। विवेकानंद जी द्वारा दी गई शिक्षा आज इतने वर्षों पश्चात भी प्रासंगिक हैं। स्वामी जी का मानना था कि भारत की आध्यामिकता का जीवित रहना विश्व के लिए आवश्यक है, आज उसी भारतीय संस्कृति को युवा भूलते जा रहे हैं। अपनी उन्नत संस्कृति हो पुनः आत्मसात करने की आवश्यकता है, इसी से राष्ट्र पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकेगा। अभाविप द्वारा परिसर चलो अभियान की शुरुवात की जा रही है, इस पहल से परिसर को पुनः जीवंत बनाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि आज के युग में विद्यार्थियों को मैकाले की शिक्षा पद्धति से निकालने के प्रयास करने पड़ेंगे और सही मायनो में शिक्षा का अर्थ चारित्रिक और व्यवहारिक विकास है इसे स्थापित करना पड़ेगा।

सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.हरेंद्र राय ने कहा कि शिक्षा परिसर विशेषकर विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने हेतु सतत प्रयास की आवश्यकता है।शिक्षा के माध्यम में मोबाइल,लैपटॉप के प्रवेश से एवं इनकी अति उपयोगिता से विद्यार्थी व्यवहारिक शिक्षा से दूर होता जा रहा है।

 

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