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#67thABVPConf : इच्छाओं से नही इरादों से होता है राष्ट्र निर्माण : कैलाश सत्यार्थी

अजीत कुमार सिंह

ये पंडाल एक लघु समुद्र है जिसमें दुनियाभर की लहरें गोते लगा रही हैं। मैं यहां पर परिषद के कार्यकर्ताओं के भीतर उठती तेजस्वी तरंगों को महसूस कर पा रहा हूं। मुझे लगता है इस सुविचारित और संस्कारित तरंग को यह पंडाल कैद नहीं कर सकता, जब विचारों की हवा चलेगी तो इसकी वैचारिक सुंगध दूर तक जायेगी। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 67 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी ने कही। उन्होंने अधिवेशन में शामिल होने के पूर्व के संस्मरण को सुनाते हुए कहा कि मैं जब यहां आ रहा था तो मेरे सहयोगी ने कहा कि भाईसाहब आप अभाविप के राष्ट्रीय अधिवेशन में जा रहे हैं, मैं परिषद का कार्यकर्ता रहा हूं आपके लिए कुछ लेख या भाषण लिख दूं क्या ? चूंकि वहां पर देश भर की युवा तरूणाई शामिल होगी। मैंने उनसे कहा कि दूसरों के पास बोलने के लिए तैयारी की जरूरत पड़ती है, अपनों से संवाद करने के लिए शब्दों की नहीं अपितु भावनाओं की जरूरत होती है। उनके इस वक्तव्य को सुनते ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

भारत माता की जय और वंदे मारतम के उद्घोष से अपने वक्तव्य को प्रारंभ करने वाले श्री सत्यार्थी ने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर आकर मैं भाव विभोर हो गया हूं। इस संगम में आए विभिन्न राज्यों के युवाओं का जोश देखकर आज भारत माता भी गर्व महसूस कर रही होगीं। राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। युवा पीढ़ी विध्वंसक नहीं बल्कि सृजन का आधार है। अग्नि के एक कण से ही आग फैलती है और हम सब के अंदर जल रही अग्नि से ही देश समाज सुधार की ओर अग्रसर होगा।

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ईंट, गारे और पत्थर से राष्ट्र निर्माण नहीं होते, युवाओं के सपनों से राष्ट्र बनते हैं

मुख्य अतिथि कैलाश सत्यार्थी ने अभाविप कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ईंट, गारे और पत्थर से राष्ट्र निर्माण नहीं होते हैं, राष्ट्र का निर्माण युवाओं के सपनों से होता है। राष्ट्र निर्माण इच्छाओं से नहीं इरादों से होता है। राष्ट्र निर्माण दब्बू बनकर नहीं साहस से होता है। राष्ट्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि हमारे बोलने, सोचने और करने में अंतर न हो। युवाओं के सपने, इरादे संकल्प, साहस और सहकार से ही राष्ट्र निर्माण होता है। हमारी सीमा अनंत है। पूरी दुनिया एक घोसले की तरह है, जिसमें हमसभी एक साथ निवास करते हैं।

देश के हर एक नागरिक को नोबेल पुरस्कार का श्रेय

डॉ सत्यार्थी ने बताया कि जब मुझे नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तब मैंने यह चिट्ठी लिखी कि मैं यह पुरस्कार भारत माता को समर्पित करता हूं। यह श्रेय न ही मुझे, न ही मेरे घर को जाता है यह श्रेय भारत माता को जाता है। साथ ही भारत के प्रत्येक नागरिक को जाता है। भारत कभी बूढ़ा नहीं होगा, भारत शाश्वत हैं। हम साथ चलेंगे। कोई बिछड़ेगा नही, कोई पिछड़ेगा नहीं।

हमारे देश में हजारों समस्याएं हो सकती हैं लेकिन लाखों समस्याओं का समाधान भारत में ही है

अपने संस्मरण को याद करते हुए सत्यार्थी जी ने कहा कि नोबेल पुरस्कार मिलने के तुरंत बाद विदेशी पत्रकारों ने मुझसे  देश के हालात पर सवाल किये। सवाल के जवाब मैंने कहा कि कि हमारे देश में हजारों समस्याएं हो सकती है लेकिन लाखों समस्याओं का समाधान भारत में ही है। हमारा देश समस्याओं को उजागर करने वाला नहीं बल्कि उसका समाधान करने पर विश्वास करता है। यहां सैकड़ो समस्याएं हो सकती है। मगर हम वो देश हैं जो समस्या के करोड़ों समाधान निकालना जानते हैं।

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अनुशासित संगठन है विद्यार्थी परिषद

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जो अपनी एकता के लिए जाना जाता है। अभाविप विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। परिषद परिवार के विचार यहां की संस्कृति से जुड़ी हुई है। आये दिन देश भर में बेटियों और बच्चों के साथ दुराचार की घटनाएं देखने को मिलती है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को बेटियों के लिए सुरक्षा चक्र बनना होगा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का 67 वां राष्ट्रीय अधिवेशन जबलपुर में प्रारम्भ हुआ। अधिवेशन के उद्घाटन एवं प्रा यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार के वितरण में नोबल शांति पुरस्कार प्राप्तकर्ता कैलाश सत्यार्थी, प्रा यशवंत राव केलकर युवा पुरस्कार 2021 विजेता कार्तिकेयन गणेशन, अभाविप राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा छग्गनभाई पटेल एवं राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी उपस्थित रहे, क्षेत्रीय संगठन मंत्री नीरव गिलानी, अधिवेशन स्वागत समिति अध्यक्ष जीतेन्द्र कुमार जामदार, स्वागत समिति सचिव संदीप जैन, महाकौशल अभाविप प्रान्त अध्यक्ष संदीप खरे एवं प्रदेश मंत्री सुमन यादव उपस्थित रहे। अभाविप के अधिवेशन में देश भर के 700 से अधिक प्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे एवं हज़ारों प्रतिनिधि देश भर के 2704 स्थानों पे आभासीय माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। तीन दिन तक चलने वाले अधिवेशन में कश्मीर से कन्याकुमारी एवं अटक से कटक तक सभी क्षेत्रों से प्रतिनिधि सम्मिलित है। इस अधिवेशन में शिक्षा, वर्तमान परिदृश्य, खेलों आदि पर प्रस्ताव पारित होंगे एवं वर्ष भर के लिए मंथन होगा। अभाविप की वर्ष भर की कार्यकारिणी भी अधिवेशन में घोषित होगी। अभाविप के अधिवेशन से पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद् की बैठक भी संपन्न हुई जिसमें जनजाति गौरव दिवस मनाये जाने को लेकर केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। इस अवसर पर अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा कि कोरोना की विपरीत परिस्थितियों के बाद भी अभाविप ने अपने कार्य में नवाचार किया । जिन भी युवाओं के पास आईडिया हैं हम उन्हें प्लेटफार्म देने का काम करेंगे ।

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