e-Magazine

Other Religion and Persuasion (ORP) एवं जनगणना

(मूलनिवासी, आदिवासी, जनजाति समाज – हिन्दू समाज Census जनगणना)
प्रो. आनंद पालिवाल

जनगणना वह प्रक्रिया है, जिसके तहत एक निश्चित समयांतराल (भारत में प्रत्येक दस वर्ष की अवधि में) पर किसी भी देश में निर्धारित सीमा में रहे लोगों की संख्या, उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन से संबंधित आंकड़ों को इकट्ठां कर,उनका अध्ययन किया जाता है तथा संबंधित आंकड़ों को प्रकाशित किया जाता है।

भारतीय संविधान की धारा 246 के अनुसार देश की जनगणना कराने का दायित्व सरकार को सौंपा गया हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची की क्रम संख्या 69 पर अंकित है। जनगणना संगठन केन्द्रीय गृह के अधीन कार्य करता है जिसका उच्चतम अधिकारी भारत का महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त होता है।

जनगणा के समय, यह प्रश्न उठाया जाता है कि एक मत का कॉलम और होना चाहिए जिसमें पहले animist मत और  अब यह कहा जाता है कि ORP other Religious Practice उल्लेखित हो। पर यह कॉलम किसके लिए ?

क्या अलग-अलग शब्दावली से गढ़ कर जनजाति समाज जो हिन्दू समाज का अभिन्न अंग है उसके पृथक दिखाने के लिए ?

क्या उक्त धारणा के पीछे कोई ऐतिहासिक, सामाजिक विधिकच सार तत्त्व है या इसकी शुरूआता एक षडयंत्र के रूप में की गई थी जिसे वर्तमान में उसी षडयंत्र के तहत पोषित किया जा रहा है।

हम सबसे पहले जबसे Census यानि जनगणना शुरूआत की गई तब से विवेचना करते हैं –

Census of India 1891, Report Vol – 1 Page – 158

Sir A.J.Baines जो Census Commissioner  थे ने स्पष्ट कहा कि जनजाति समाज हिन्दू है या हिन्दू नहीं है में बांटना व्यर्थ है। क्योंकि भारतीय समाज का प्रत्येक स्तर कम या ज्यादा Animistic अवधारणाओं से संतृप्त है पर जो थोड़ा ऊपर उठे उन्होंने धार्मिक उत्थान किए।

1901 Census The People of India Second edition Page 218, 233 & 245

Sir Herbert Risley ने अध्ययन का अंतिम निष्कर्ष में कहा कि हिन्दू धर्म और के बीच में अंतर की कोई रेखा नहीं खींची जा सकती है क्योंकि यह एक दूसरे को ढके हुए है या एक दूसरे में समाहित से है।

1911 Census of India, Vol I Part – I Page 129,130

Sir E.A. Gait The Commissioner of census ने टिप्पणी की एक व्यक्ति अपनी सभी मान्यताओं को मानते हुए, पुजारी से मंदिर में पूजा भी करवाता है, चढ़ावा देते है, पर यह कहा नहीं जा सकता कि वह कब हिन्दू बन गया, यानी animistic belief और हिन्दू  belief में कोई अंतर नहीं है।

Census of India 1921- Bihar & Orissa Report page 125 and Bombay 1921

Mr. P. C. Tallents, the Superintendent at the census operation in Bihar and Orisa and Mr. Sedgwick, the Superintendent of the census in Bombay के  सामने हिन्दू एवं Animist में अंतर करने का संकट उत्पन्न हो गया और Mr. Sedgwick ने स्पष्ट रूप से कहा कि  Animistic को मत के रूप में पूर्णतः नकार देना चाहिए और सभी जिनको Animist में वर्णित करने को कहा है, को हिन्दूओं में ही वर्गीकृत करना चाहिए।

READ  पटना : अभाविप के संघर्ष ने लाया रंग, मगध वि.वि. के कुलपति पर हुई कार्रवाई

Census of India 1921, India Report Vol 1 Part – I page 111

अब इसमें आगे देखिये कि Mr. J.T. Marten जो Census  के  Commissioner थे उनके तर्कों से अत्यंत प्रभावित हुए और Animist को Tribal Religion में परिवर्तित कर दिया, पूर्व के Census में भी पर वो इस Tribal Religion शब्दावली से जरा भी संतुष्ट नहीं थे उन्होंने टिप्पणी की अगर Animist शब्द अस्पष्ट है, जिस संदर्भ में इसे प्रयोग किया जा रहा है तो Tribal Religion शब्द भी किसी भी तरह से निश्चित या स्पष्ट नहीं है कि वह क्या दर्शाता है ?

1931 Census of India, India Report Vol I Part – I page – 397

Dr. J. A. Hutton Commissioner of Census में Tribal Religion को रखा और हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई आदि के साथ इस शब्द का भी उपयोग किया और Tribal Religion जनजाति समाज को इसमें वर्गीकृत कर अलग करने का प्रयास किया, पर उन्होंने भी स्पष्ट टिप्पणी की हिन्दू एवं Tribal Religion में अंतर करना या अंतर की कोई रेका खींचना बहुत कठनि है और सभी Tribal जनजाति को हिन्दूओं में ही वर्गीकृत करना चाहिए।

Census Report, Central Provinces and Berar 1931, Vol – I XII Part – I, Page – 329

Mr. Stent जो कि अमरावती के Deputy Commissioner थे Census Officer को एक नोट भेजा कि सभी शिक्षित अधिकारी और वो स्वयं यह मानते है कि गोंड, कोरकु, भील, गोवारिस एवं बंजारा सभी हिन्दू है। यह जब गांव में बसता है तो हिन्दू ही रहते हैं – कोई भेद या अंतर नहीं है।

Census of India 1931 Central Provinces and Berar Report Vol XII, Part – I, page 397 & 393

The Aboriginal Problem in the Central Provinces and Berar page – 8

Mr. W. V. Grigson ICs – Dr. V. Twins की राय से सहमत थे कि सभी Aborigine मूल निवासी को हिन्दू ही मानना चाहिए।

Mr. W. H. Shoobert जो कि Census के Superintendent थे Central Provinces and Berar के, ने तो इस भू-भाग के लिए हिन्दू धर्म को न मानते हुए यहां सभी को हिन्दू जाति (Race) बता दिया। कारण उन्हें यहां इनमें इतनी समानताएं नजर आई कि उन्होंने कहा कि यह सब एक दूसरे से समाहित है। परंतु दूरी के कारण और संपर्क की कमी के कारण संस्कृति में भिन्नताएं उत्पन्न हुई है।

READ  लावण्या केस में सीबीआई जांच सुनिश्चित कराने व तमिलनाडु में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए कार्यकर्ताओं की रिहाई को लेकर अभाविप का विरोध प्रदर्शन

Census of India 1941, Vol – I Chapter IV page 29

अब जो Census बना इसमें 1931 के  Census के स्पष्ट अंतर था। जनगणना समुदाय आधारित थी न कि धर्म आधारित। इसे और स्पष्ट करते हुए यदि कोई जनजाति ईसाई भी बन गए थे तो उन्हें भी जनजाति में दिखाया गया इससे भारत में ईसाईयों की संख्या  6040665 आई जो पिछले बार की भारत में ईसाईयों की संख्या से 256098 कम थी। इसका तात्पर्य यह नहीं था कि भारत मे ईसाईयों की संख्या नहीं बढ़ी अपितु कॉलम के वर्गीकरण की आड़ में जो संख्या 3474128 बढ़ी थी उसे छिपा दिया गया।

ऊपर जब हम सभी   Census Commissioners की रिपोर्ट की विवेचना करते हैं तो ऐसा कोई भी आधार नहीं मिलता है जो कि हिन्दू समाज एवं जनजाति समाज को अलग करे। परंतु फिर भी इन्हें बार – बार अलग करने का षड़यंत्र का सत्या सामने आता ह कि जब हम ईसाई मिशिनिरियों की गतिविधियों को देखते हैं।

भारत में अगर हम विश्व के राष्ट्रों के अनुसार देखें कि यहां पर किस – किस राष्ट्र के ईसाई मिशनरी, ईसाई मत के प्रचार-प्रसार और मतांतरण के लिए सक्रिया है तो उसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन, ब्राजील, आस्ट्रेलिया, अर्ण्जेटीना, फिनलैंड, पुर्तगाल, ईटली, हंगरी, डेनमार्ग, नीदरलैंण्ड, जर्मन, स्वीटजरलैण्ड, बैल्जीयम, स्पैन, कनाडा, आयरलैंड के नाम सामने आते हैं। साथ ही History of Christian Mission के पेज 317 एवं 314 में भी उल्लेखित है कि ईसाई मिशनिरियों का मुख्य काम इतिहास, भूगोल, गणित इत्यादि विषय पढ़ाना नहीं अपितु ईसाई मत का प्रचार – प्रासर है। मेडिकल सेवाओं एवं शिक्षा संस्थानों का केन्द्रीय बिंदू ईसाई मता का प्रचार है।

ईसाई मिशनरी द्वारा मतांतरण के लिए भजन गायन, बाइबल को यीशू भागवत बताना, तुलसीदास रामायण में वर्णित गिरजा पूजना को गिरजा-घर बताना, भगवान राम , कृष्ण, हनुमान का यीशू से मिलना, गिरजा-घर में मुंडन इत्यादि करवाना, परिक्रमा लगाना आदि जो कार्य किये जा रहे हैं वो स्वयं भी यह प्रमाणित करते हैं कि जनजाति समाज हिन्दू समाज का अभिन्न अंग है। इसलिए हिन्दू धर्म-शास्त्र, पूजा – विधि,आदि सबका रूपांतरण करते हुए ईसाई मिशनरी मतांतरण में लिप्त है।

स्वंय Mr. Bains ने  Census Report 1891 Vol XI, page 79 में भी इस ओर इंगित किया है कि जनजाति समाज में अशिक्षा एवं भोलेपन का फायदा उठाकर ईसाई मिशनरी मतांतरण में ज्यादा सफल हो सकते हैं।

READ  Karthikeyan Ganesan of Villupuram (Tamil Nadu) awarded the prestigious Prof. Yeshwantrao Kelkar Youth Award 2021

हिन्दू कोड बिल पर बहस करते हुए जनजाति विषय पर अंबेडकर जी का स्पष्ट रूख था “We not want this anarchy. A Hindu is Hindu for all purpose” अगर कोई जनजाति यह कहती है कि वो हिन्दू नहीं है तो यह उन्हें साक्ष्यों के साथ साबित करना है कि वह हिन्दू नहीं है।

भारतीय संविधान में अनुच्छेत -46 जो इस बात का आह्वान करता है कि राज्य जनता के दुर्बल वर्गों के विशेषतया अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित आदिम जनजातियों की शिक्षा तथा अर्थ संबंदी हितों की विशेष सावधारीन से अभिवृद्धि करेगा तथा सामाजिक अन्याय तथा सब प्रकार के शोषण से उनका संरक्षण करेगा, को सम्मिलित करने का उद्देश्य भी जनजाति समाज को ईसाई मिशनरियों के मतांतरण के प्रभाव से बचाना था। कर्नल मिक के पत्र क्रमांक FE/3/137, दिनांक 15 अप्रैल 1937 से भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि ईसाई मिशनरी कितनी उग्रता के साथ मतांतरण में लिप्त है कि तत्कालिन ब्रिटिश सरकार को भी इनके ऊपर प्रतिबंध लगाने पड़े और यह कहना पड़ा कि शिक्षा और सेवा की आड़ में मतांतरण गतिविधियां व्यापकता के साथ की जा रही है।

आज Other Religion and Persuasion (ORP) जैसे कॉलम की जनगणना की मांग  करने वाले जो भी लोग हैं वो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उनंहीं षड़यंत्रकारी ताकतों का प्रतिनिधित्व करने को प्रयासरत है जो स्वतंत्रता के पूर्व ही इस विघटन के लिए प्रयासरत रही थी, पर कभी उन्हें इसका कोई ठोस आधार नहीं मिल पाया। लॉर्ड मैकाले हो या ईसाई मिशनरी सबको यह पता था कि हिन्दू धर्म एवं संस्कृति इतनी उन्नत है कि बगैर इस पर प्रहार किये या इससे पृथक किये बिना मतांतरण असंभव प्रतीत होता है। मतांतरण का जो कार्य अमेरिका, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड इत्यादि जनजाति समाज में उन्हें आसानी से पूर्ण होता लगा वही कार्य यहां हिन्दू धर्म और संस्कृति की वजह से एक बहुत बड़ी चुनौती बना। यही  कारण है कि अलग-अलग शब्दावली गढ़कर हिन्दू समाज को विघटित करने का प्रयास किया जा रहा है।

अब ये हमारे ऊपर है कि हम अपने पूर्वजों की सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं से अपनी पहचान स्वीकारेंगे या अंग्रेजों एवं उनके Census Officers द्वारा गढ़ी गयी शब्दावली से… ???

(लेखक, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर (राजस्थान) के विधि महाविद्यालय में अधिष्ठाता हैं।)

×
shares