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छात्रशक्ति मई 2023

संपादकीय

तपती गर्मी पर्यावरण की चिंता भूले बैठे लोगों को भी उसकी याद दिला देती है। 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन पर्यावरण को लेकर तरह-तरह के आयोजन किये जाते हैं। अकादमिक चर्चाएं आयोजित की जाती है। पृथ्वी के बढ़ते तापमान और उसके मूल कारण, बढ़ते उत्सर्जन को कम करने को एक चुनौती के रूप में देखे जाने की बात होती है। यहीं भारत और पश्चिम का चिंतन आमने-सामने आ खड़े होते हैं।

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप हजारों वर्षों से चली आ रही माँग आधारित उत्पादन की व्यवस्था उत्पादन के लिये माँग उत्पन्न करने की नीति पर चल पड़ी। इस नीतिगत परिवर्तन के पीछे भीमकाय उद्योगों द्वारा किये गये बेहिसाब उत्पादन को कृत्रिम माँग उत्पन्न कर बाजार में खपा देने देने की दृष्टि थी। अधिकतम मुनाफा इसका पहला और अंतिम लक्ष्य था। परिणाम यह हुआ कि प्राकृतिक संसाधनों का विनाश कर भी उत्पादनों को प्रोत्साहन दिया गया।

आज जब नदियाँ जलहीन हो रही हैं, ग्लेशियर सिमट रहे हैं, महानगर कूड़ें के पहाड़ों को जन्म देने लगे हैं, जनसंख्या उद्योगों के निकट सिमटने से जल, जंगल और जमीन का संकट उत्पन्न हुआ है, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ लगता है मानवता को ही लील जायेंगे, ऐसे में पर्यावरण के लिये केवल दिवस मना लेना ही काफी नहीं है। यह पृथ्वी और मानवता इससे कहीं अधिक की आशा हमसे करती है।

सामाजिक जीवन में श्रम को प्रतिष्ठा मिले, रसायनों पर निर्भरता कम हो, विकास का सूचकाँक उपभोग की क्षमता के स्थान पर संतुष्टि के स्तर को बनाया जाय, ऊर्जा के नवीकरणीय रूपों को प्राथमिकता दी जाय, बचत को केवल आर्थिक संदर्भ में ही नहीं अपितु प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी देखा जाय, अधिकतम आवश्यकताओं को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सके ऐसी व्यवस्था बने और इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाय।

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देश-दुनियाँ में विमर्श का बिन्दु बने अनेक नकारात्मक विषय अथवा ऐसे विषय, जो मुठ्ठी भर लोगों से जुड़े हों, सकारात्मक अथवा वैश्विक महत्व के प्रश्नों को हाशिये पर धकेल देते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे खराब मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से बाहर कर देती है। भारत, जो सदैव से विश्वबंधुत्व और लोकमंगल का उदघोष करता रहा है, पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व से भी दूर नहीं जा सकता। इसके लिये हमें प्रकृति को भारतीय दृष्टि से देखना होगा, जड़ों की ओर लौटना होगा जिसकी पहल देश के छात्र-युवाओं को करनी होगी।

हार्दिक शुभकामना सहित,

संपादक

 

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