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श्रीनिवास

शिक्षा से स्त्री सशक्तिकरण का मार्ग दिखाने वाली सावित्रीबाई फुले

विश्व के हर समाज में चेतना और जड़ता का चक्र अनवरत चलता रहता है| चेतना के उत्कर्ष के काल में समाज प्रगति करता है| समाज के सभी व्यक्ति सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक और अध्यात्मिक रूप से विकास करते ह...

गुरु नानक की शिक्षा के सूत्र से बंधा सनातन बंधुत्व

भारत अन्य अनेक देशों की तरह विशेष प्रकार की ऐतिहासिक और राजनीतिक परिस्थितियों से नहीं जन्मा और न ही यह किसी राजपरिवार या समुदाय की राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतिफल है| यह एक नैसर्गिक सांस्कृतिक-भौगोलिक...

गुरु नानक देव : सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के दिव्य सूत्रधार

भारत अन्य अनेक देशों की तरह विशेष प्रकार की ऐतिहासिक और राजनीतिक परिस्थितियों से नहीं जन्मा, और न ही यह किसी राजपरिवार या समुदाय की राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतिफल है। यह एक नैसर्गिक सांस्कृतिक-भौगोलिक...

आपातकाल के 19 माह: जब लोकतंत्र की धारा को तानाशाही ने अवरुद्ध किया 

भारत सनातन काल से लोकतांत्रिक राष्ट्रीयता का स्वाभाविक पोषक रहा है।भारत के प्राचीनतम कालखण्ड से लेकर आधुनिक भारत के वर्तमान तक लोकतंत्र ही भारत का मूल स्वभाव रहा  है।इसका कारण यह है कि भारत की राष्ट्र...

कश्मीर के जर्रे-जर्रे पर तिरंगा लहराना ही, श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि

डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी को 52 साल से भी कम आयु मिली थी, लेकिन उनके कृतित्व और बलिदान ने उन्हें सदा सदा के लिए अमर बना दिया है| 5 अगस्त 2019 को जब भारतीय संसद में केंद्रीय गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर र...

जन्मजात राष्ट्रभक्त व अनुपम योद्धा, क्रांतिदृष्टा – विनायक सावरकर

मां भारती की राष्ट्र मलिका के धागे में एक से एक बेशुमार मोती समाये है। ऐसे ही एक क्रांति सूर्य की आज जयंती है। राष्ट्र का कण – कण अपने इस सपूत विनायक दामोदर सावरकर जी को शत-शत नमन करता है। 28 मई...

उम्मीदों की बाती से जली नवजीवन की ज्योति

भारत के सनातन सत्य को पुनः देख कर आज पूरा विश्व विस्मित है। मानव सभ्यता के उन्नति और पतन के तो कई सन्दर्भ मिलते है। परंतु शाश्वत मूल्यों पर निरन्तर अजर व अमर भारत चिरस्थाई राष्ट्र के रूप में अडिग खड़ा...

अभाविप के लिए संकटकाल में सेवा ही देशभक्ति

आज भारत सहित पूरी दुनिया कोरोना विषाणु की महामारी से लड़ रही है। यह अभी भी एक रहस्य है कि यह विषाणु  प्रकृति उत्पन्न है या मानव की विकृत सोच का परिणाम। जो भी हो लेकिन संकट तो पूरी मानवता के सामने आ गया...

निर्भया के इंसाफ के लिए अभाविप ने लड़ी सड़क से संसद तक की लड़ाई

निर्भया के दरिंदों को आज फांसी दी गई। फांसी देने के बाद लोगों के चेहरे पर सुकून का भाव है लेकिन इसके लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लंबी लड़ाई लड़ी। पिछले सात वर्षों से लगातार परिषद के कार्यकर्ता...

सरलता, सहजता और सौम्यता की मूर्ति डा.राजेंद्र बाबू

पुण्यतिथि विशेष सरलता, सहजता और सौम्यता की मूर्ति डा.राजेंद्र प्रसाद जी हमारे देश के पहले राष्ट्रपति थे। दुर्भाग्य से, देश में विमर्श की मुख्यधारा में उनका यही संक्षिप्त परिचय पर्याप्त माना जाता है। र...

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